एक सिलसिले की उम्मीद थी उनसे

एक सिलसिले की उम्मीद थी उनसे, वो बस यूँ ही फ़ासले बढ़ाते चले गये, हम तो पास आने की कोशिश में थे, ना जाने क्यों वो हमसे दूरियाँ बढ़ाते चले गये!!

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