मैं आदत हूँ उसकी

मैं आदत हूँ उसकी, वो ज़रूरत हैं मेरी, मैं फरमाइश हूँ उसकी, वो इबादत है मेरी, इतनी आसानी से कैसे निकाल दूँ उसे अपने दिल से, मैं ख्वाब हूँ उसका वो हक़ीकत हैं मेरी!!

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ये ज़िन्दगी न जाने

ये ज़िन्दगी न जाने कैसे तेरी ज़रूरत बन गयी, न जाने ये मुहब्बत क्यों तुमसे जुड़ गयी, अब तो मेरा ही मुझ पर कोई ज़ोर न रहा, न जाने कैसे तेरी हुकूमत मेरे दिल पर हो गयी!!

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मोहब्बत मुक़द्दर है

मोहब्बत मुक़द्दर है एक ख्वाब नहीं, ये वो अदा है जिसमे सब कामयाब नहीं, जिन्हें पनाह मिली उन्हें उँगलियों पर गिन लो, मगर जो फना हुए उनका कोई हिसाब नहीं!!

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