पत्थर जैसी दुनिया में

पत्थर जैसी दुनिया में दिल अपना लगा बैठे, कुछ ही दिनों में मीठे सपने सज़ा बैठे, रोकते थे पहले लोगों को इस आग से, अब खुद ही को इस आग में जला बैठे!!

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क्यूँ तेरा नाम दिल में

क्यूँ तेरा नाम दिल में सुबह-शाम गूँजता है, क्यों तेरे सिवा मुझे कुछ और नहीं सूझता है, यह सवाल जब भी पूछता हूँ तो जवाब मिलता है, क्या कभी चाँद भी रोशिनी को भूलता है!!

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