मुहब्बत का ख़ुमार

मुहब्बत का ख़ुमार कुछ इस क़दर उतरा,
जिसे मन्ज़िल समझते थे, वो तो बेमक़सद रास्ता निकला!!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *