मेरे जीने के लिए

मेरे जीने के लिए तेरे अरमान ही काफ़ी हैं,
कुछ हो ना हो दिल की ये दास्तान ही काफ़ी है,
तीर-ए-तलवार की तुझे क्या ज़रूरत ए नाज़नी,
क़तल करने के लिए तेरी मुस्कान ही काफ़ी है!!

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