कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी

कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
बहुत टूट कर चाहा जिनको हमने,
आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी!!

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