हर पल कुछ सोचते रहने की आदत हो गयी है

हर पल कुछ न कुछ सोचते रहने की आदत सी हो गयी है,
हर आहट पर चौंक जाने की आदत सी हो गयी है,
तेरे इश्क़ में ऐ बेवफा, हिज्र की रातों के संग,
हमको भी जागते रहने की आदत सी हो गयी है!!

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