बरसो गुज़र गए हमने रोकर नहीं देखा

बरसो गुज़र गए हमने रोकर नहीं देखा,
आँखों में नींद थी सोकर नहीं देखा,
वो क्या जाने दर्द-ऐ-मोहब्बत क्या है,
जिसने कभी किसी का होकर नहीं देखा!!

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