अब उन गलियों से गुज़रने में वो बात नहीं

अब उन गलियों से गुज़रने में वो बात नहीं,
बीते हुए वक़्त का अब वो एहसास नहीं,
नहीं है इंतज़ार अब उसका इन खिड़कियों पे आने का,
और न है उम्मीद उसे देख अब मुस्कुराने का,
कहती थी जो हमेशा साथ चलेगी,
वो पहले कदम पर ही राह बदल पड़ी,
अकेले इस राह पर चलते हुए अब हो गया मुझे एक अरसा,
पता नहीं फिर भी मिलने को क्यों आज भी हूँ इतना तरसा!!

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